पटना, 03 अक्टूबर 2026: घोघरडीहा प्रखंड स्वराज्य विकास संघ (GPSVS) की ओर से पटना के होटल द पनाश में ‘सुरक्षित रोजगार मार्गदर्शिका’ (Safe Employment Guidebook) के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें श्रम, प्रवासन, ग्रामीण आजीविका, शिक्षा, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ व प्रतिनिधि शामिल हुए।
परामर्श का मुख्य उद्देश्य और पृष्ठभूमि
इस उच्च-स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘सुरक्षित रोजगार मार्गदर्शिका’ को श्रमिकों, प्रवासी परिवारों और ग्रामीण समुदायों के लिए अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाना था। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि रोजगार की तलाश में अपने गृह राज्य या गांव से बाहर जाने वाले श्रमिकों को प्रस्थान से पहले ही पूरी तरह सटीक, विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के शोषण या धोखे का शिकार होने से बच सकें।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में श्री गणेश कुमार झा (उप श्रम आयुक्त, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, पटना) विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा श्री रमेश कुमार (चेयरपर्सन एवं प्रोजेक्ट डायरेक्टर, GPSVS), डॉ. कृष्ण मुरारी (UNDP), श्री अनिश रंजन (SPO, BRDS), श्री गणेश कुमार (कंसल्टेंट, BRLPS), डॉ. अविरल पांडेय (PU), श्री आनंद कुमार (S2 Media), श्रीमती प्रियंका (स्टेट को-ऑर्डिनेटर, JanSahas) और डॉ. अजय कुमार झा (GPSVS) सहित कई गणमान्य विशेषज्ञों ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।
चर्चा के प्रमुख बिंदु और विशेषज्ञों के सुझाव
परामर्श के दौरान मार्गदर्शिका की विषय-वस्तु और समुदाय स्तर पर इसकी पहुंच को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया गया:
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व्यापक सुरक्षा का दायरा: सुरक्षित रोजगार केवल काम मिलना नहीं है, बल्कि सुरक्षित कार्यस्थल, समय पर उचित मजदूरी, श्रमिकों के कानूनी अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, शिकायत निवारण और आपातकालीन सहायता की मुकम्मल व्यवस्था भी इसमें शामिल है।
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प्रस्थान से पूर्व की तैयारी: रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों के पास नियोक्ता की पूरी जानकारी, कार्य की प्रकृति, वेतन, आवास की व्यवस्था और कार्य की शर्तों से जुड़े दस्तावेज होने चाहिए।
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समुदाय स्तर पर जागरूकता: CSOs (नागरिक समाज संगठनों) और CBOs (समुदाय-आधारित संगठनों) के माध्यम से बिचौलियों के शोषण, मानव तस्करी और असुरक्षित प्रवासन के खिलाफ गाँवों में निरंतर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
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सरल और स्थानीय भाषा: मार्गदर्शिका से जुड़ी जानकारियों को अत्यंत सरल और स्थानीय भाषाओं में श्रमिकों तक पहुँचाया जाए, ताकि आम मजदूर इसे आसानी से समझ सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी हितधारकों ने बिहार के श्रमिकों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और आकांक्षी रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने तथा उनके अधिकारों की रक्षा के वास्ते आपसी समन्वय और सामूहिक प्रयास को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया।