Anand Kumar

कृषि पर भीषण गर्मी का प्रहार

पर्यावरण डेस्क भीषण गर्मी केवल तापमान का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जटिल श्रृंखला है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारी पूरी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र (Agricultural Ecosystem) को अस्त-व्यस्त कर देती है। इन्फोग्राफिक के अनुसार, इसके प्रभाव को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: प्रत्यक्ष प्रभाव: भूमि और…

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ChatGPT से बेहतर परिणाम पाने के 8 जादुई फ्रेमवर्क्स

टेक डेस्क: ChatGPT केवल एक चैटबॉट नहीं, बल्कि एक अत्यधिक बुद्धिमान सहायक है। इसे सही निर्देश देने के लिए इन 8 ढांचों (Frameworks) का उपयोग करें: 1. R-T-F (Role – Task – Format) यह सबसे बुनियादी और प्रभावी फ्रेमवर्क है। भूमिका (Role): AI को बताएं कि वह कौन है (जैसे: “एक अनुभवी न्यूज़ एडिटर की…

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“ACP विक्रांत” में अभिनेता विनय आनंद की दमदार वापसी, अपनी दमदार अदाकारी ने लूटी वाहवाही

भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता विनय आनंद एक बार फिर सुर्खियों में हैं।लंबे अंतराल के बाद उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शानदार वापसी करते हुए एकता कपूर और शोभा कपूर की वेब सीरीज़ “ACP विक्रांत” में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। इस सीरीज़ में उनके दमदार अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिल…

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आपका क्या दाँव पर लगा है?

आजकल सोशल मीडिया पर हर कोई हर मुद्दे पर विशेषज्ञ बन रहा है। लेकिन नसीम निकोलस तालेब की मशहूर किताब ‘स्किन इन द गेम’ (Skin in the Game) हमें एक बहुत कड़वा और ज़रूरी सबक सिखाती है—अगर किसी मुद्दे पर बोलते वक्त आपका खुद का कुछ दाँव पर नहीं लगा है, तो आपकी राय ‘अप्रासंगिक’…

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बिहार में युवा बेरोजगारी: आँकड़ों के आईने में एक कड़वी हकीकत

आज एक बार फिर एक ऐसे विषय पर जो हमारे राज्य ‘बिहार’ के भविष्य से सीधे जुड़ा है— बेरोजगारी। हाल ही में जारी PLFS 2025 (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे) के आंकड़ों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। जब हम भारत के नक्शे पर नजर डालते हैं, तो बिहार की स्थिति हमें सोचने पर…

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विभिन्न प्रकार

आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI केवल एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे जीवन के हर पहलू का हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI केवल एक प्रकार का नहीं होता? कार्यक्षमता और उपयोग के आधार पर इसे मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित…

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हम एआई क्यों नहीं सीख पाते?

अगर जूते याद ही आने हैं तो प्रेमचंद के फटे जूते याद आते न? भला नवाब साहब के जूतों में ऐसा क्या साहित्यिक या दार्शनिक होगा जो हमें नवाब साहब के जूते याद आये? कोई भी सुनने वाला हमसे यही प्रश्न पूछेगा। असल में नवाब साहब के जूतों की कहानी असली है भी या किसी…

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क्या एआई (AI) संपादक (Editor) की जगह ले सकता है?

संपादन में एआई की मदद कैसे लें, ये सवाल कभी न कभी छात्र-छात्राओं के मन में तो जरूर उठता है। कई लम्बे लेख कॉलेज असाइनमेंट में जमा करने होते हैं और अगर एआई से ऐसा किया जा सके तो काफी मदद तो मिल ही जायगी। ऐसी स्थिति में याद रखने लायक सबसे जरूरी बात ये…

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जब एक नदी ‘इंसान’ बन गई

ह्वान्गानुई नदी और कानूनी अधिकार का सफर कल्पना कीजिए कि एक नदी अदालत में अपना मुकदमा खुद लड़ सकती है, उसकी अपनी संपत्ति हो सकती है और उसे नुकसान पहुँचाने पर वही कानूनी कार्रवाई हो सकती है जो एक इंसान को चोट पहुँचाने पर होती है। 2017 में न्यूज़ीलैंड ने ‘ते अवा टुपुआ’ (Te Awa…

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आपदा की आहट और ‘मूक’ पुकार

क्या हमारी चेतावनी प्रणाली समावेशी है? जब संकट का शोर सबके लिए एक समान न हो तो क्या होगा? बाढ़, भूकंप या चक्रवात—प्राकृतिक आपदाएं किसी में भेदभाव नहीं करतीं। लेकिन क्या हमारी ‘प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ (Early Warning System) उतनी ही निष्पक्ष है? अक्सर, जब लाउडस्पीकर पर खतरे का सायरन बजता है, तो हम यह मान…

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