सुपौल | विशेष रिपोर्ट
बिहार के सुपौल जिले में अपनी खोई हुई बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ अब रंग लाने लगा है। जिलाधिकारी श्री सावन कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस पांडुलिपि खोज अभियान के तहत जिले के युवाओं और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में त्रिवेणीगंज की युवा दीपिका चंद्रा ने सदियों पुराने इतिहास को खोज निकाला है, जिससे क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
परिवार से मिली अमूल्य विरासत
सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अंतर्गत गुड़िया पंचायत के बेलापट्टी निवासी दीपिका चंद्रा के पास करीब 20 ऐसी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित पाई गई हैं, जो 153 से लेकर 350 वर्ष तक पुरानी हैं। इन ऐतिहासिक ग्रंथों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि दीपिका को यह धरोहर उनके पूर्वजों—मलाढ़ निवासी कृपानंद झा एवं बिमलानंद झा—से विरासत में मिली थी। इस मिशन को धरातल पर उतारने में ‘माय भारत’ के पूर्व वॉलंटियर इन्दल कुमार की भी अहम भूमिका रही है, जो अभियान की शुरुआत से ही गाँवों में जाकर ऐसी छिपी हुई धरोहरों के सर्वेक्षण कार्य में जुटे हुए हैं।
क्या है इन दुर्लभ पांडुलिपियों में?
विशेषज्ञों के अनुसार, खोज में सामने आए ये ग्रंथ मुख्य रूप से संस्कृत भाषा और प्राचीन मिथिलाक्षर (तिरहुता) लिपि में लिखे गए हैं। इनमें से कुछ पांडुलिपियां तो 350 साल पुरानी हैं, जो सुपौल और मिथिला क्षेत्र के गौरवशाली व समृद्ध इतिहास की गवाही देती हैं। यह प्राचीन दस्तावेज उस कालखंड की लेखन शैली, बौद्धिक प्रखरता और ज्ञान-विज्ञान की गहरी समझ का जीवंत प्रमाण हैं।
प्रशासन ने युवाओं के प्रयासों को सराहा
युवाओं के इस उत्साह और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की ललक को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने इस पहल को अतुलनीय बताते हुए कहा कि अपनी जड़ों और इतिहास को तलाशने का यह जज्बा अन्य युवाओं के लिए भी एक बड़ी मिसाल और प्रेरणा है।
जिलाधिकारी की नागरिकों से विशेष अपील
जिले की सांस्कृतिक संपदा को बचाने के इस महाअभियान को और विस्तार देते हुए जिलाधिकारी श्री सावन कुमार ने सुपौल के समस्त नागरिकों, मठों, मंदिरों और पुरानी ग्रंथालयों के प्रबंधकों से अपील की है:
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यदि आपके पास या आपके परिसरों में ऐसी कोई भी हस्तलिखित प्राचीन सामग्री या पांडुलिपि सुरक्षित है, तो उसे जिला प्रशासन के साथ साझा करें।
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इस मुहिम में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले व्यक्तियों को जिला प्रशासन की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
जिला प्रशासन की यह अनूठी पहल न केवल हमारी बिखरी हुई स्मृतियों को सहेजने का काम कर रही है, बल्कि नई पीढ़ी को यह अहसास भी करा रही है कि उनके पूर्वज ज्ञान, विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में कितने समृद्ध थे।