वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव पर शैलेंद्र प्रताप ने तेजस्वी यादव को किया सम्मानित
पटना. वीर कुंवर सिंह के 168वें विजयोत्सव के अवसर पर गुरुवार को कालिदास रंगालय स्थित अनुसुइया सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट की ओर से किया गया, जिसमें बिहार आर्ट थिएटर के छात्रों ने वीर कुंवर सिंह की गाथा का सजीव मंचन प्रस्तुत किया।
वीर कुंवर सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सह राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अंगवस्त्र एवं मोमेंटो भेंट कर विजयोत्सव की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि विचारों के संगम का मंच है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और वीर कुंवर सिंह भले ही अलग प्रतीत होते हों, लेकिन दोनों के विचारों की जड़ एक ही है-स्वाभिमान, सम्मान और राष्ट्र के प्रति समर्पण। उन्होंने कहा कि वीर कुंवर सिंह ने यह संदेश दिया कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना उतना ही जरूरी है, जितना शांति और सहिष्णुता को बनाए रखना।

उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में भी वीर कुंवर सिंह का संघर्ष यह साबित करता है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। उनका आंदोलन केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं था, बल्कि असमानता, अन्याय और समाज को विभाजित करने वाली सोच के विरुद्ध भी था। श्री सिंह ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि आज समाज में विभाजन और अविश्वास जैसी चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्षत्रिय समाज की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समाज ने इतिहास में नेतृत्व और बलिदान की परंपरा को कायम रखा, आज वह हाशिए पर महसूस कर रहा है।
वहीं भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट के सचिव प्रो. ज्ञान देव मणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व को बहुआयामी बताते हुए कहा कि वे केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों वाले दार्शनिक भी थे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन कर्मयोग का उदाहरण है, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि 1857 के स्वाधीनता संग्राम में उन्होंने जीवन के अंतिम चरण में भी संघर्ष का मार्ग चुना, जो उनके अदम्य साहस और उच्च जीवन-दृष्टि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत आज भी हमारे राष्ट्रीय चरित्र और संस्कारों में जीवित है।
कार्यक्रम में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष राकेश राव ने कहा कि वीर कुंवर सिंह का व्यक्तित्व समदर्शिता और धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि उनकी सेना विविधताओं का संगम थी, जहां सभी वर्गों के लोग एक लक्ष्य-स्वाधीनता-के लिए एकजुट थे। इस अवसर पर बिहार आर्ट थिएटर के महासचिव कुमार अभिषेक रंजन सहित कन्हैया राव, संजय सिंह, अमित सिंह, नितेश राव सोलंकी, कुणाल किशोर सिंह, मधुकांत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर वीर कुंवर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।