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भोजपुरी गीत में आपत्तिजनक एवं जातिसूचक सामग्री के मामले में मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार सख्त, साइबर पुलिस को कार्रवाई के निर्देश

– माननीय मंत्री, कला एवं संस्कृति डॉ. प्रमोद कुमार ने विवादित भोजपुरी गीत के मामले में साइबर आईजी एवं साइबर एसपी को विधि-सम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए।

– YouTube पर प्रसारित गीत के Lyrics, Video, Audiovisual Presentation एवं Digital Context की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने को कहा गया।

– मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकगीत-संगीत की आड़ में अश्लीलता, फूहड़ता, जातिसूचक अथवा किसी वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी।

पटना। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार के माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने वायरल भोजपुरी गीत, जिसमें जाति सूचक तथा अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, से संबंधित विवाद का संज्ञान लेते हुए मामले में आवश्यक साइबर जांच एवं विधि-सम्मत कार्रवाई के लिए साइबर आईजी एवं साइबर एसपी को निर्देश दिया है। यह गीत YouTube सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के बाद आपत्तियों के घेरे में आया है।

मामले में नाई/सैन समाज की ओर से भी ज्ञापन सौंपकर संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने तथा गायक के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल में श्री संदीप ठाकुर, श्री कृष्ण ठाकुर, श्री अखिलेश शर्मा, श्री देव किशन ठाकुर, श्री सतीश ठाकुर सहित अन्य लोग शामिल थे।

माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि लोकगीत एवं लोकसंगीत बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से समाज और संस्कृति की सकारात्मक अभिव्यक्ति होनी चाहिए। लोकगीत-संगीत के नाम पर अश्लीलता, फूहड़ता, जातिसूचक टिप्पणी अथवा किसी समुदाय, व्यक्ति या विशेष रूप से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

माननीय मंत्री ने साइबर पुलिस से कहा है कि उपलब्ध वीडियो एवं डिजिटल सामग्री की निष्पक्ष जांच की जाए। जांच के दौरान गीत के Lyrics, वीडियो, Audiovisual Presentation तथा उससे जुड़े Digital Context का परीक्षण किया जाए। यदि सामग्री में किसी जाति, समुदाय या व्यक्ति के विरुद्ध अपमानजनक, मानहानिकारक, अश्लील अथवा सामाजिक वैमनस्य उत्पन्न करने वाली सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, मामले में Digital Evidence को सुरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित कानूनी प्रक्रिया पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके बाद लागू विधिक प्रावधानों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित डिजिटल सामग्री को हटाने अथवा रोकने की कार्रवाई की जाएगी।

माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, नागरिकों की गरिमा तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना है। सरकार ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

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