बिहार में लगातार बदल रहे जलवायु पैटर्न, भीषण बाढ़, जानलेवा लू (हीटवेव) और मौसमी बीमारियों के प्रकोप से ग्रामीण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर चुनौती से मुकाबले के लिए अब सामुदायिक स्तर पर सुदृढ़ पहल तेज हो गई है। हाल ही में पटना स्थित ए. एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान में घघरडीहा प्रखंड स्वराज्य विकास संघ (GPSVS), मधुबनी के तत्वावधान में “जलवायु समर्थ स्वास्थ्य प्रणाली (CRHS) को मुख्यधारा में लाने में आयुष की भूमिका” विषय पर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का मुख्य केंद्र बिहार में जलवायु-समर्थ स्वास्थ्य प्रणाली के लिए महिलाओं के नेतृत्व में चलाई जा रही सामुदायिक पहल रही। इसमें राज्यभर के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के 50 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ-साथ जाने-माने आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों और राज्य आयुष समिति के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
ग्रामीण स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा और आयुष की प्रासंगिकता
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश कुमार ने अपने स्वागत संबोधन में कहा, “बाढ़, लू और मच्छर जनित बीमारियाँ बिहार के गाँवों में हर साल गंभीर रूप लेती जा रही हैं। यदि महिलाओं की अगुवाई में समुदाय, पंचायत और स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिलकर काम करें और इसमें आयुष की पारंपरिक समझ को जोड़ दिया जाए, तो हमारे गाँव इन खतरों का डटकर मुकाबला कर सकते हैं।”
दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में डॉ. धनंजय शर्मा (राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, राज्य आयुष समिति, बिहार), डॉ. शिव मंगल मिश्र (उप निदेशक, आयुष, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार, सेवानिवृत्त), डॉ. अशोक दुबे, डॉ. शिवादित्य ठाकुर, डॉ. (प्रो.) कुमारी उमा पाण्डेय, डॉ. उषा मिश्रा और डॉ. रोहित सहित कई विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन किया गया।
सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े और तकनीकी सत्र
कार्यक्रम के पहले तकनीकी सत्र में डॉ. अजय कुमार झा और श्री प्रशांत कुमार सिंह ने GPSVS के अनुभवों को साझा किया। संस्था वर्तमान में बिहार के 8 जिलों—मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, पटना, नालंदा, भोजपुर, वैशाली और सारण—के 100 गाँवों में यह पहल चला रही है, जो अब अपने तीसरे वर्ष में है।
वर्ष 2026 के दौरान किए गए एक सर्वेक्षण के आंकड़े बेहद चिंताजनक रहे:
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90% से अधिक परिवारों ने बीमारियाँ बढ़ने की बात स्वीकार की।
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लगभग 80% परिवारों को भीषण गर्मी और लू से परेशानी उठानी पड़ी।
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लगभग 61% परिवार मलेरिया और डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों से प्रभावित पाए गए।
तकनीकी सत्रों में राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना की प्राचार्य डॉ. (प्रो.) कुमारी उमा पाण्डेय ने आयुष में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. रोहित ने ‘ऋतुचर्या’ के माध्यम से मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए तथा डॉ. धनंजय शर्मा ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए बिहार में आयुष मिशन की भूमिका पर अपने विचार रखे।
दूसरे तकनीकी सत्र में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शिवादित्य ठाकुर ने डेंगू-मलेरिया जैसे जलवायु-संवेदी रोगों के लिए आयुर्वेदिक अस्पतालों की तैयारियों का जिक्र किया। डॉ. अशोक दुबे ने जलवायु और प्रदूषण जनित रोगों पर, डॉ. उषा मिश्रा ने महिला, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य में आयुर्वेद की महत्ता पर और डॉ. शिव मंगल मिश्र ने ‘एक स्वास्थ्य’ (One Health) की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा की।
श्रमिकों की आजीविका और कॉर्पोरेट सहयोग पर मंथन
श्री दीपक शर्मा और श्री रमेश कुमार की अध्यक्षता में हुए भोजनोपरांत सत्र में जन साहस फाउंडेशन की राज्य समन्वयक श्रीमती प्रियंका कुमारी और श्री दीपायन ने जलवायु परिवर्तन के बीच श्रमिकों के व्यावसायिक और आजीविका स्वास्थ्य पर बात रखी। कार्यशाला में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2024 में अत्यधिक गर्मी और ताप के कारण देश को 247 अरब संभावित श्रम-घंटों का नुकसान उठाना पड़ा है।
बैद्यनाथ, पटना के मानव संसाधन प्रबंधक डॉ. एस. एन. ठाकुर ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से स्वयंसेवी संगठनों के लिए संसाधन जुटाने के तौर-तरीके सुझाए। इसके बाद श्री आनंद कुमार और श्री अभिषेक आनंद के संचालन में एक खुली चर्चा संपन्न हुई।
सरकार के समक्ष रखी गई प्रमुख माँगें
कार्यशाला के अंत में विचार-विमर्श के आधार पर सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख माँगें रखी गईं:
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आयुष को ‘राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम’ तथा बिहार की राज्य कार्ययोजना में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाए।
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गाँव स्तर के इस मॉडल को ‘ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति’ (VHSNC) तथा समुदाय-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण योजनाओं के साथ जोड़ा जाए।
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हर मौसम बदलाव से पहले लू, मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए नियमित और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
कार्यक्रम का समापन श्री अरुण कुमार एवं श्री सुनील कुमार (GPSVS) द्वारा प्रस्तुत आगे की रूपरेखा और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
Great coverage of the program