बिहार की विकास यात्रा, संस्कृति, साहित्य और अर्थव्यवस्था पर हुआ व्यापक विमर्श

पटना, 23 मार्च: ऐतिहासिक पटना संग्रहालय (जादूघर) में पाटलिपुत्र विमर्श समिति द्वारा 21-22 मार्च को दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं एवं बुद्धिजीवियों समेत 300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

“पाटलिपुत्र विमर्श 2026” कार्यक्रम के पहले दिन श्री प्रेम कुमार, माननीय अध्यक्ष, बिहार विधानसभा मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने बिहार की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है, किंतु अपनी उपलब्धियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में ऐसे आयोजनों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण, सड़क निर्माण, शिक्षा एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए साइकिल-पोशाक योजना, गंगा जल आपूर्ति, कोसी-मेची लिंक परियोजना तथा जल-जीवन-हरियाली अभियान को बिहार के विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

युवा अध्येता हर्ष सिन्हा द्वारा संचालित उदघाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें बिहार की विकास यात्रा में साहित्य, संस्कृति-विरासत, स्वास्थ्य, विकास, तकनीक एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के योगदान, चुनौतियों और आगे की राह पर गहन चर्चा हुई।

“बिहार की अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान में उद्यमिता की भूमिका” विषयक पहले तकनीकी सत्र में मनीष कुमार (संस्थापक, B2V, बैक टू विलेज), सिद्धार्थ शंकर (संस्थापक, ह्यूमैन्टिक्स) एवं सचिन गुप्ता (गिनी, द हॉलमार्क ज्वेलर्स) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उद्यमिता बिहार के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बन सकती है। वक्ताओं ने ग्रामीण उद्यमिता, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास को राज्य के पुनरुत्थान की कुंजी बताया। इस सत्र का संचालन मोटिवेशनल स्पीकर एवं स्टार्टअप मेंटर मानवेंद्र कुमार ने किया।

“पाटलिपुत्र से वर्तमान समय तक: बिहार की साहित्यिक यात्रा” विषयक दूसरे सत्र में प्रसिद्ध लेखिका डॉ. भावना शेखर ने बिहार की महिला साहित्यकारों के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। ए.एन. कॉलेज के प्रोफेसर कुमार वरुण ने मध्यकालीन कवियों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक तनाव के दौर में साहित्य समाज को शीतलता प्रदान करता है। इस सत्र का संचालन प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ध्रुव कुमार द्वारा किया गया, जिन्होंने युवाओं को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

“संस्कृति, विरासत और विकास” सत्र में डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से युवाओं को जोड़ने की आवश्यकता बताई, जबकि हेरिटेज सोसाइटी के संयोजक डॉक्टर अनंताशुतोष द्विवेदी ने अभिलेखों को स्थानीय स्तर पर ही संरक्षित करने एवं प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड्स की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्र के संचालक अभिषेक आनंद ने शिक्षा प्रणाली में विरासत आधारित शिक्षण के समावेश का महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया, जिस पर वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की।

“बिहार की बाढ़” विषयक सत्र में जीपीएसवीएस संस्था के अध्यक्ष रमेश सिंह ने अपने तीन दशकों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल के वर्षों में बाढ़ से जनहानि को कम करने में सफलता मिली है, किंतु आर्थिक एवं कृषि क्षति को कम करने की दिशा में अभी और प्रयास अपेक्षित हैं। यूनिसेफ बिहार में डीआरआर विशेषज्ञ राजीव कुमार ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदाओं के साथ सामंजस्य बनाकर जीना सीखना आवश्यक है। इस सत्र का संयोजन आचार्य आनंद कुमार द्वारा किया गया, जिन्होंने सरकार एवं समाज की साझा भूमिका पर बल दिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी बिहार दिवस के अवसर पर आयोजित विभिन्न सत्रों में तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। टेलिकॉम इंडस्ट्री के अनुभवी पेशेवर अनिमेष कुमार मिश्रा द्वारा संचालित प्रथम सत्र में प्रो. संदीप कुमार (आईआईटी दिल्ली), सुमित कुमार (संस्थापक, सामर्थ्य क्लासेस) तथा संजय कुमार (निदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया) ने तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं डिजिटल विकास में बिहार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

द्वितीय सत्र में डॉ. संजीव कुमार (IGIMS), डॉ. अरुण कुमार (महावीर कैंसर संस्थान) एवं प्रो. तृप्ति गंगवार (ए.एन. कॉलेज) ने स्वास्थ्य अवसंरचना, कैंसर अनुसंधान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने पर चर्चा की। प्रो. संजीव कुमार (डीन, स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स, बेनट यूनिवर्सिटी) ने इस सत्र का संचालन किया और एक सकारात्मक सोच के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने पर बल दिया।

आलोक कुमार (विशेषज्ञ एवं परामर्शदाता, बिहार विकास मिशन) द्वारा संचालित तीसरे सत्र प्रो. सूर्य भूषण (डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, पटना), माधवेंद्र सिंह (HSBC बैंक) एवं आशुतोष कश्यप (HDFC बैंक) ने बिहार की आर्थिक संभावनाओं, वित्तीय समावेशन एवं विकास प्रबंधन पर अपने विचार व्यक्त किए।

इसी क्रम में आयोजित विशेष सत्र में स्वामी अनंत वीर्य दास (अक्षय पात्र, वृंदावन) ने बिहार में आध्यात्मिकता एवं टेम्पल इकोनॉमी की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए इसे सामाजिक-आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।

पाटलिपुत्र विमर्श समिति के संयोजक अभिनव प्रकाश ने विश्वास जताया कि बिहार की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक पहचान एवं उभरती आर्थिक संभावनाओं पर सार्थक संवाद के एक प्रभावी मंच के रूप में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। अनिमेष कुमार मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

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