जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर सख्त प्रशासन, डीएम दीपेश कुमार ने दिए नियमों के शत-प्रतिशत अनुपालन के निर्देश
विशेष रिपोर्ट | बिहार विमर्श (सहरसा)
सहरसा (03 अगस्त 2026)। सहरसा समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में सोमवार को जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2016 के तहत गठित जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी श्री दीपेश कुमार (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस समीक्षा बैठक में जिले भर के सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की गहन पड़ताल की गई।
अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर
बैठक के दौरान जिले के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं और अन्य चिकित्सा केंद्रों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट (Bio-Medical Waste) के सुरक्षित संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक विधि से निस्तारण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील विषय है।
बैठक के मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश:
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कलर-कोड प्रणाली का अनुपालन: डीएम दीपेश कुमार ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो-मेडिकल वेस्ट नियमावली के नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अस्पतालों में रंग-कोड (Color-Coded) आधारित अपशिष्ट पृथक्करण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
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समयबद्ध निष्पादन और एजेंसी की जवाबदेही: अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का समय पर और सुरक्षित उठाव व निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
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नियमित निरीक्षण व कार्रवाई के आदेश: संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनियमितता पाई जाती है, तो दोषी संस्थानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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अंतर-विभागीय समन्वय: जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय बनाकर काम करने की हिदायत दी।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
इस उच्चस्तरीय बैठक में सिविल सर्जन, अपर समाहर्ता (ADM), जिला प्रदूषण नियंत्रण पदाधिकारी सहित जिले के विभिन्न सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
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