पटना। बिहार की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण में अपनी पूरी जिंदगी खपा देने वाले दिग्गजों के योगदान पर केंद्रित बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘बिहार के पर्यावरण स्तंभ’ का विधिवत विमोचन मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को बिहार विधान परिषद के सभागार में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक पहल के साथ ही बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसके पास अपने राज्य स्तरीय पर्यावरणविदों के जीवन, विचार और कार्यों को दस्तावेजी रूप में पिरोने वाली एक समर्पित पुस्तक उपलब्ध है।
यह गरिमामयी समारोह गुरुश्रेष्ठ प्रो. रास बिहारी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व विभाग के माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी की विशेष उपस्थिति रही।
समारोह में पर्यावरण, शिक्षा और नीति-निर्माण क्षेत्र की कई अग्रणी शख्सियतों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की:
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पद्मश्री प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा (प्रसिद्ध ‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया’)
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प्रो. संतोष कुमार (पूर्व प्राचार्य, एनआईटी)
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प्रो. संजय पासवान (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
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अरविंद मिश्रा (सुप्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ)
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प्रो. चंद्रावती कुमारी (पूर्व विभागाध्यक्षा, पर्यावरण विज्ञान)
तीन वर्षों की निष्ठा और गुरु-ऋण चुकाने का प्रयास
इस अवसर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए लेखक ने इसे एक अत्यंत सुखद और भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बीते तीन वर्षों की अथक साधना और शोध का परिणाम है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने गुरुजनों के महान कार्यों को भावी पीढ़ियों के लिए संकलित करने का प्रयास किया है।
लेखक ने अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “जब इस संकल्प की शुरुआत हुई थी, तब राहें धुंधली थीं और लेखन की प्रक्रिया को लेकर संशय था। लेकिन गुरुजनों के आशीर्वाद और उद्देश्य की पवित्रता ने धीरे-धीरे मार्ग प्रशस्त किया। आज यह प्रयास आप सभी के सम्मुख एक पुस्तक के रूप में साकार हो सका है।” उन्होंने इस पूरी यात्रा में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से संबल देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति अपना सहृदय आभार व्यक्त किया।
बिहार के एक और ज्वलंत विषय पर जल्द आएगी अगली कृति
पर्यावरणविदों के योगदान को सहेजने की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही लेखक ने अपनी आगामी योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिहार के एक अन्य विशिष्ट और महत्वपूर्ण सामाजिक-भौगोलिक मुद्दे को रेखांकित करती हुई उनकी तीसरी पुस्तक भी पूरी तैयारी में है और बहुत जल्द पाठकों के बीच होगी।