राजगीर, बिहार: प्राचीन भारत के स्वर्णिम ज्ञान केंद्र नालंदा की ऐतिहासिक भूमि एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रही है। 12 से 15 मार्च, 2026 तक राजगीर में ‘नालंदा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव’ (NILF) 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा । यह महोत्सव न केवल साहित्य का उत्सव है, बल्कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की उस गौरवशाली भावना को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है, जहाँ कभी दुनिया भर के विद्वान ज्ञान की खोज में एकत्रित होते थे ।
चार दिवसीय महोत्सव का स्वरूप
महोत्सव का मुख्य आयोजन 12 से 14 मार्च तक राजगीर अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में होगा । कार्यक्रम के अंतिम दिन, 15 मार्च को बिहार की समृद्ध पर्यटन विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ‘हेरिटेज वॉक’ का आयोजन किया जाएगा । इस चार दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ में भारत सहित दुनिया भर के 70 से अधिक लेखक, दार्शनिक, पत्रकार और विचारक शामिल होकर विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे ।
इस आयोजन की वैश्विक व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, सूरीनाम, फिजी और तिब्बत जैसे देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे । विशेष रूप से सूरीनाम और फिजी के प्रतिनिधि उन ‘गिरमिटिया प्रवासियों’ की आवाज का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिनका मूल बिहार की मिट्टी से जुड़ा रहा है ।
दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा
महोत्सव के मंच पर साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता और कला जगत की कई नामचीन हस्तियाँ नजर आएंगी । प्रमुख अतिथियों में डैनियल हन, वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, भावना सोमाया, गगन गिल, शिक्षाविद कविता शर्मा और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हैं । कला और सिनेमा जगत से दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर, अभिनेत्री भाषा सुंबली, थिएटर हस्ती संध्या गोखले और अंतर्राष्ट्रीय रैपर चैतन्य शर्मा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे । इनके अलावा नीलोत्पल मृणाल और संजीव कुमार जैसे युवा चेहरों के माध्यम से कविता और संवाद की धारा बहेगी ।
बिहार की बौद्धिक विरासत को मुख्य मंच
महोत्सव का एक प्रमुख उद्देश्य बिहार की स्थानीय प्रतिभाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है । आयोजकों का मानना है कि नालंदा का पुनरुत्थान यहाँ के कहानीकारों और लेखकों के सम्मान के बिना अधूरा है । इसीलिए रत्नेश्वर सिंह और राम बचन राय जैसे प्रतिष्ठित लेखकों के साथ कई उभरते हुए स्थानीय रचनाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विचारकों के साथ संवाद करने का अवसर दिया जाएगा ।
मुख्य विषय: भारत की आधुनिक यात्रा
महोत्सव का केंद्रीय विषय (Theme) “रीक्राफ्टिंग भारत: विश्व बंधु से विश्वगुरु तक” रखा गया है । यह विषय आधुनिक दुनिया में प्राचीन भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता और भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित है ।
“लिट भी, लिट्टी भी”: संस्कृति और स्वाद का संगम
साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ यह महोत्सव बिहार के खान-पान और पाक विरासत का भी जश्न मनाएगा । अमात्य फाउंडेशन द्वारा दिया गया जीवंत नारा “लिट भी, लिट्टी भी” इस महोत्सव का आकर्षण बढ़ा रहा है । पहली बार अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए बिहार के प्रामाणिक व्यंजनों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा । पाक कला विशेषज्ञ शेफ निशांत चौबे और कीर्ति झा मेहमानों को पारंपरिक बिहारी स्वाद का अनुभव कराएंगे ।
कला और सामुदायिक पहल
कला प्रेमियों के लिए यहाँ लाइव पेंटिंग कार्यशाला और प्रदर्शनी का आयोजन होगा, जहाँ ‘परिधि आर्ट ग्रुप’ के निर्मल वैद और अन्य कलाकार “गौरवशाली नालंदा” विषय पर लाइव कलाकृतियाँ बनाएंगे । इसके अलावा, थारू जनजातीय समुदाय की भागीदारी के जरिए बिहार की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा ।
ग्रामीण क्षेत्रों के लेखकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए “लिट कनेक्ट” नामक पहल की शुरुआत की गई है । इसके माध्यम से गाँवों और छोटे शहरों के नए लेखकों को सीधे प्रकाशकों से मिलने का मौका मिलेगा ।
नई पीढ़ी के लिए “नालंदा कॉमिक्स”
बच्चों में नालंदा की ऐतिहासिक विरासत के प्रति जिज्ञासा जगाने के लिए “नालंदा कॉमिक्स” का शुभारंभ किया जाएगा । इसकी पहली पुस्तक “पातालोक” है, जिसे दिव्याभ आर्यन द्वारा क्यूरेट और डिज़ाइन किया गया है । इसका उद्देश्य बच्चों को नालंदा की कहानियों से जोड़ना और उन्हें यह समझाना है कि नालंदा केवल खंडहर नहीं बल्कि ज्ञान की एक जीवित स्मृति है ।
“NalandAi” का विजन और भविष्य की राह
आयोजन के माध्यम से “नालंदा-आई” (NalandAi) नामक एक ज्ञान समुदाय के निर्माण का विजन रखा गया है । यह समूह लेखकों, शिक्षकों और पाठकों को एक साथ लाएगा । इसका दीर्घकालिक लक्ष्य बिहार के गाँवों में पुस्तकालयों को प्रोत्साहित करना और राज्य में 100% साक्षरता के सपने को साकार करना है । यह आंदोलन राजनीति, जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर केवल ज्ञान को ‘विकसित भारत’ की नींव के रूप में स्थापित करने के संकल्प पर आधारित है ।
इस महोत्सव की पूरी अवधारणा के पीछे महोत्सव की क्यूरेटर वैशाली सेता और उनके साथी दिव्याभ आर्यन व अदिति नंदन हैं, जो पिछले 19 वर्षों से बिहार की कला, संस्कृति और विरासत के दस्तावेजीकरण में जुटे हैं ।
आयोजकों को उम्मीद है कि इस आयोजन के बाद दुनिया एक बार फिर बिहार की ओर उसी सम्मान से देखेगी, जिस तरह प्राचीन काल में यह भूमि पूरे विश्व को आलोकित करती थी ।
अधिक जानकारी के लिए देखें: www.nalandainternationalliteraturefestival.org