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बिहार भूमि सुधार: अधिकार, समाधान और डिजिटल भविष्य

बिहार में भूमि सुधार न केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का आधार भी है। ‘बिहार भूमि सुधार अधिनियम’ के माध्यम से मालिकाना हक, बटाईदारी और सुगम अधिकारों (Easement Rights) को स्पष्ट किया गया है। 1. भूमि अधिकार: कानून की सुरक्षा बिहार का कानून विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं…

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बिहार विधान मंडल की महिला सदस्य भी हुईं महिला सशक्तिकरण संबंधी परिचर्चा में शामिल

पटना, 28 फरवरी 2026 समाज कल्याण विभाग, बिहार द्वारा आज बिहार विधान सभा के विस्तारित भवन स्थित ऑडिटोरियम में बिहार विधान मंडल की माननीय महिला सदस्यों के साथ महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित विभिन्न योजनाओं पर परिचर्चा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के…

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स्मार्तविचारम: जब एक महिला के खुलासे से हिल गई कोचीन रियासत की नींव

केरल के कोचीन रियासत में एक युवती कुरियेडाथु थत्री (जिन्हें थथ्रिकुट्टी या सावित्री के नाम से भी जाना जाता है) को 1905 में व्यभिचार (अनैतिक संबंध) के आरोप में स्मार्तविचारम नामक एक कठोर पारंपरिक मुकदमे में घसीटा गया। यह मुकदमा नंबूदरी ब्राह्मण समाज में तबकी धार्मिक और कानूनी परम्पराओं के निर्धारण का एक नियम था…

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जब ‘न्याय’ का मुखौटा पहनकर आता है नफरत का नया संस्करण!

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी पूरी आबादी को ‘दुष्ट’ या ‘शोषक’ घोषित करना होता है, तो सबसे पहले ‘काल्पनिक अन्याय’ (Imagined Injustice) की एक थ्योरी गढ़ी जाती है। नाज़ी जर्मनी इसका सबसे भयानक उदाहरण है। हिटलर और उसके प्रोपेगेंडा मंत्री गोएबल्स ने जर्मन जनता के मन में यह बात बैठा दी थी कि…

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भोजपुरी हीरो पर भारी पड़ रहीं अक्षरा सिंह

भोजपुरी सिनेमा की सुपरस्टार एक्टर और सिंगर अक्षरा सिंह ने इंडस्ट्री के उस धारणा को तोड़ने का काम किया, जिसमें कहा जाता था कि फीमेल एक्टर की पहचान मेल एक्टर से होती है. अक्षरा ने इस ट्रेंड को बदल दिया और इसलिए समय – समय पर वे अपनी उपलब्धियों के साथ सुर्ख़ियों में रहती हैं….

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जीडीपी की नई श्रृंखला : अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

27 फरवरी, 2026   सकल घरेलू उत्पाद क्या है?   सकल घरेलू उत्पाद, जिसे आमतौर पर जीडीपी के तौर पर जाना जाता है, एक लेखा अवधि में घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तु और सेवा का मूल्य है। अर्थव्यवस्था में एक अवधि से दूसरी अवधि में सार्थक तरीके से हुए बदलाव का आकलन करने के…

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ओस की बूंदों और भैरव के सुरों से सजी पटना की सुबह: ईको पार्क में ‘संगीत बिहान’ की गूंज

​पटना। राजधानी की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच आज की सुबह कुछ अलग थी। ईको पार्क की हरियाली पर बिखरी ओस की चांदी जैसी बूंदें और ताजी हवा के झोंकों के बीच जब बनारस घराने के सुर घुले, तो टहलने निकले शहरवासी ठिठक कर रह गए। कला एवं संस्कृति विभाग तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी…

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