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क्या प्रशासनिक विफलता की ओर जा रहा है महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय?

राजेश सारथी की फेसबुक वाल से महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय लम्बे समय से जिस दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, वह केवल प्रशासनिक विफलता का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसे संस्थागत पतन का प्रतीक बन चुका है जहाँ सत्ता, संरक्षण और चयनात्मक कार्रवाई ने शिक्षा, नैतिकता और न्याय…

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क्या भारत का कुपोषण संकट ‘नीतिगत उपेक्षा’ का परिणाम है?

जब भी देश में कुपोषण के आंकड़े (NFHS-5) आते हैं, तो सरकारी विज्ञापनों और जागरूकता अभियानों की बाढ़ आ जाती है। लेकिन एक कड़वा सच जिसे हम अक्सर दबा देते हैं, वह यह है कि कुपोषण का बोझ केवल माँ के कंधों पर डालकर हम अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपा रहे हैं। आंकड़ों और जमीनी…

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क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है?

‘POSH कानून’ से क्यों कतराती हैं कंपनियाँ? कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए बना ‘पॉश एक्ट’ (Prevention of Sexual Harassment – POSH Act, 2013) भारत के कॉर्पोरेट इतिहास का एक मील का पत्थर है। लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी एक कड़वा सवाल आज भी खड़ा है –…

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जब भारत ने अमेरिका से जीती ‘हल्दी की जंग’

विशेष रिपोर्ट साल 1995 में जब अमेरिका के पेटेंट कार्यालय (USPTO) ने मिसिसिपी विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ताओं को ‘घाव भरने के लिए हल्दी के उपयोग’ का पेटेंट दे दिया, तो पूरी दुनिया हैरान थी। जिस हल्दी का उपयोग भारत में 5,000 वर्षों से हर घर की दादी-नानी घाव सुखाने के लिए कर रही थीं, उस…

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कृषि पर भीषण गर्मी का प्रहार

पर्यावरण डेस्क भीषण गर्मी केवल तापमान का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जटिल श्रृंखला है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारी पूरी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र (Agricultural Ecosystem) को अस्त-व्यस्त कर देती है। इन्फोग्राफिक के अनुसार, इसके प्रभाव को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: प्रत्यक्ष प्रभाव: भूमि और…

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सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगी रोक – बिहार

पटना | राज्य डेस्क बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक ऐतिहासिक संकल्प जारी किया है। ‘सात निश्चय-2’ के अंतर्गत घोषित कार्यक्रमों के तहत अब सरकारी डॉक्टरों के निजी क्लीनिक चलाने या निजी प्रैक्टिस करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।…

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बिहार में युवा बेरोजगारी: आँकड़ों के आईने में एक कड़वी हकीकत

आज एक बार फिर एक ऐसे विषय पर जो हमारे राज्य ‘बिहार’ के भविष्य से सीधे जुड़ा है— बेरोजगारी। हाल ही में जारी PLFS 2025 (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे) के आंकड़ों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। जब हम भारत के नक्शे पर नजर डालते हैं, तो बिहार की स्थिति हमें सोचने पर…

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हम एआई क्यों नहीं सीख पाते?

अगर जूते याद ही आने हैं तो प्रेमचंद के फटे जूते याद आते न? भला नवाब साहब के जूतों में ऐसा क्या साहित्यिक या दार्शनिक होगा जो हमें नवाब साहब के जूते याद आये? कोई भी सुनने वाला हमसे यही प्रश्न पूछेगा। असल में नवाब साहब के जूतों की कहानी असली है भी या किसी…

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जब एक नदी ‘इंसान’ बन गई

ह्वान्गानुई नदी और कानूनी अधिकार का सफर कल्पना कीजिए कि एक नदी अदालत में अपना मुकदमा खुद लड़ सकती है, उसकी अपनी संपत्ति हो सकती है और उसे नुकसान पहुँचाने पर वही कानूनी कार्रवाई हो सकती है जो एक इंसान को चोट पहुँचाने पर होती है। 2017 में न्यूज़ीलैंड ने ‘ते अवा टुपुआ’ (Te Awa…

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बिहार की सारण घटना: जातिगत नफरत की भयावह सच्चाई और समाज की चुप्पी

बिहार के सारण जिले में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 12 मार्च 2026 की शाम को एक 16 वर्षीय राजपूत समुदाय की कक्षा 10 की छात्रा को उसके गांव के पांच पुरुषों द्वारा अपहरण कर लिया गया, सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर…

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