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जब भारत ने अमेरिका से जीती ‘हल्दी की जंग’

विशेष रिपोर्ट साल 1995 में जब अमेरिका के पेटेंट कार्यालय (USPTO) ने मिसिसिपी विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ताओं को ‘घाव भरने के लिए हल्दी के उपयोग’ का पेटेंट दे दिया, तो पूरी दुनिया हैरान थी। जिस हल्दी का उपयोग भारत में 5,000 वर्षों से हर घर की दादी-नानी घाव सुखाने के लिए कर रही थीं, उस…

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कृषि पर भीषण गर्मी का प्रहार

पर्यावरण डेस्क भीषण गर्मी केवल तापमान का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जटिल श्रृंखला है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारी पूरी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र (Agricultural Ecosystem) को अस्त-व्यस्त कर देती है। इन्फोग्राफिक के अनुसार, इसके प्रभाव को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: प्रत्यक्ष प्रभाव: भूमि और…

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सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगी रोक – बिहार

पटना | राज्य डेस्क बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक ऐतिहासिक संकल्प जारी किया है। ‘सात निश्चय-2’ के अंतर्गत घोषित कार्यक्रमों के तहत अब सरकारी डॉक्टरों के निजी क्लीनिक चलाने या निजी प्रैक्टिस करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।…

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बिहार में युवा बेरोजगारी: आँकड़ों के आईने में एक कड़वी हकीकत

आज एक बार फिर एक ऐसे विषय पर जो हमारे राज्य ‘बिहार’ के भविष्य से सीधे जुड़ा है— बेरोजगारी। हाल ही में जारी PLFS 2025 (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे) के आंकड़ों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। जब हम भारत के नक्शे पर नजर डालते हैं, तो बिहार की स्थिति हमें सोचने पर…

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हम एआई क्यों नहीं सीख पाते?

अगर जूते याद ही आने हैं तो प्रेमचंद के फटे जूते याद आते न? भला नवाब साहब के जूतों में ऐसा क्या साहित्यिक या दार्शनिक होगा जो हमें नवाब साहब के जूते याद आये? कोई भी सुनने वाला हमसे यही प्रश्न पूछेगा। असल में नवाब साहब के जूतों की कहानी असली है भी या किसी…

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जब एक नदी ‘इंसान’ बन गई

ह्वान्गानुई नदी और कानूनी अधिकार का सफर कल्पना कीजिए कि एक नदी अदालत में अपना मुकदमा खुद लड़ सकती है, उसकी अपनी संपत्ति हो सकती है और उसे नुकसान पहुँचाने पर वही कानूनी कार्रवाई हो सकती है जो एक इंसान को चोट पहुँचाने पर होती है। 2017 में न्यूज़ीलैंड ने ‘ते अवा टुपुआ’ (Te Awa…

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बिहार की सारण घटना: जातिगत नफरत की भयावह सच्चाई और समाज की चुप्पी

बिहार के सारण जिले में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 12 मार्च 2026 की शाम को एक 16 वर्षीय राजपूत समुदाय की कक्षा 10 की छात्रा को उसके गांव के पांच पुरुषों द्वारा अपहरण कर लिया गया, सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर…

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SC/ST कानून में मोदी सरकार के ऐतिहासिक बदलाव

अपराधों की सूची 22 से बढ़ाकर 47 कैसे हुई? भारतीय समाज के सबसे वंचित और पिछड़े वर्गों को न्याय दिलाने की दिशा में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) एक सशक्त कवच की भूमिका निभाता है। अक्सर राजनीति में इस कानून को लेकर चर्चाएँ होती हैं, लेकिन बहुत कम लोग यह…

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बिहार भूमि सुधार: अधिकार, समाधान और डिजिटल भविष्य

बिहार में भूमि सुधार न केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का आधार भी है। ‘बिहार भूमि सुधार अधिनियम’ के माध्यम से मालिकाना हक, बटाईदारी और सुगम अधिकारों (Easement Rights) को स्पष्ट किया गया है। 1. भूमि अधिकार: कानून की सुरक्षा बिहार का कानून विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं…

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जब ‘न्याय’ का मुखौटा पहनकर आता है नफरत का नया संस्करण!

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी पूरी आबादी को ‘दुष्ट’ या ‘शोषक’ घोषित करना होता है, तो सबसे पहले ‘काल्पनिक अन्याय’ (Imagined Injustice) की एक थ्योरी गढ़ी जाती है। नाज़ी जर्मनी इसका सबसे भयानक उदाहरण है। हिटलर और उसके प्रोपेगेंडा मंत्री गोएबल्स ने जर्मन जनता के मन में यह बात बैठा दी थी कि…

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