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क्या भारत का कुपोषण संकट ‘नीतिगत उपेक्षा’ का परिणाम है?

जब भी देश में कुपोषण के आंकड़े (NFHS-5) आते हैं, तो सरकारी विज्ञापनों और जागरूकता अभियानों की बाढ़ आ जाती है। लेकिन एक कड़वा सच जिसे हम अक्सर दबा देते हैं, वह यह है कि कुपोषण का बोझ केवल माँ के कंधों पर डालकर हम अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपा रहे हैं। आंकड़ों और जमीनी…

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आपदा की आहट और ‘मूक’ पुकार

क्या हमारी चेतावनी प्रणाली समावेशी है? जब संकट का शोर सबके लिए एक समान न हो तो क्या होगा? बाढ़, भूकंप या चक्रवात—प्राकृतिक आपदाएं किसी में भेदभाव नहीं करतीं। लेकिन क्या हमारी ‘प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ (Early Warning System) उतनी ही निष्पक्ष है? अक्सर, जब लाउडस्पीकर पर खतरे का सायरन बजता है, तो हम यह मान…

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