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पटना का ऐतिहासिक ‘सुल्तान पैलेस’ अब बीते दिनों की बात हो जाएगा

पटना (बिहार विमर्श)। राजधानी पटना के आर-ब्लॉक (R-Block) के पास स्थित स्थापत्य कला का बेमिसाल नमूना और बिहार के ऐतिहासिक गौरव का गवाह ‘सुल्तान पैलेस’ अब इतिहास के पन्नों में सिमटने की कगार पर है। राज्य सरकार द्वारा पटना में पर्यटन को बढ़ावा देने और तीन पांच सितारा (Five Star) होटल बनाने की योजना के तहत इस 100 साल पुरानी भव्य इमारत को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है। 4.8 एकड़ में फैली इस विशाल संपत्ति पर लगभग 400 कमरों वाला आधुनिक होटल बनाने की तैयारी है।

सुल्तान पैलेस को नीलाम और ध्वस्त करने की खबर के साथ ही इतिहास प्रेमियों, वास्तुकला विशेषज्ञों और आम पटनावासियों का दिल बैठ गया है। इसके साथ ही पटना के एक समृद्ध सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास के जमींदोज होने का खतरा मंडरा रहा है।

22 लाख की लागत से 1922 में बनी अनूठी इमारत

इस ऐतिहासिक हवेली का निर्माण वर्ष 1922 में बिहार के प्रसिद्ध बैरिस्टर और पटना उच्च न्यायालय के पहले न्यायाधीशों में से एक सर सुल्तान अहमद ने करवाया था। उस दौर में इस भव्य महल को बनाने में करीब 22 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च हुई थी।

आज़ादी के आंदोलन का प्रत्यक्ष गवाह रहा यह पैलेस केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला और उस दौर के शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा का प्रतीक है। चार साल पहले यह महल तब भी अचानक सुर्खियों में आया था, जब सोशल मीडिया पर इसके भीतर भूत घूमने की खबरें वायरल हुई थीं। हालांकि, इसकी असली पहचान इसकी वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत है।

इंडो-सारसेनिक शैली: मुगल, राजपूत और यूरोपीय कला का अद्भुत संगम

19वीं सदी के अंतिम वर्षों में ब्रिटिश वास्तुकारों ने राजस्थानी, मुगल, मराठा और प्राचीन भारतीय वास्तुकला को मिलाकर एक नई शैली को जन्म दिया था, जिसे इंडो-सारसेनिक (Indo-Saracenic) वास्तुकला कहा जाता है।

सुल्तान पैलेस इसी इंडो-सारसेनिक शैली की एक बेहतरीन मिसाल है:

  • शिल्पकार की कारीगरी: इसकी अद्भुत नक्काशी और डिजाइनिंग प्रसिद्ध कारीगर मंजुल हसन काजमी ने की थी।

  • जनाना और मर्दाना महल: हवेली के पिछले हिस्से को महिलाओं के लिए (जनाना महल) और आगे के हिस्से को पुरुषों के लिए (मर्दाना महल) विशेष रूप से डिजाइन किया गया था।

  • अंतरराष्ट्रीय सामग्री का इस्तेमाल:

    • सीढ़ियां: ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए म्यांमार (बर्मा) की विशेष सागौन की लकड़ी से नक्काशीदार सीढ़ियां बनाई गईं, जो 100 साल बीत जाने के बाद भी पूरी तरह मजबूत हैं।

    • शीशे: दरवाजों, रोशनदानों और खिड़कियों में लगाए गए खूबसूरत रंगीन शीशे इटली से मंगवाए गए थे।

    • सोने की नक्काशी: मुख्य हॉल और डाइनिंग रूम की छतों व दीवारों पर 18 कैरेट सोने से खूबसूरत नक्काशी और फूल-पत्तियों की चित्रकारी की गई थी।

    • सफेद संगमरमर: निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया था।

विरासत बनाम विकास: उठते कई गंभीर सवाल

सुल्तान पैलेस की खूबसूरती और इसकी अनूठी नक्काशी को निहारने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पटना आते रहे हैं। लेकिन अब आधुनिकता और विकास की दौड़ में इस 100 साल पुरानी ‘आन-बान-शान’ को पांच सितारा होटल की नींव के नीचे दबाने की तैयारी है।

विरासत प्रेमियों का मानना है कि विकास जरूरी है, लेकिन अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की कीमत पर नहीं। जिस तरह दुनिया भर में पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को ‘हेरिटेज होटल’ (Heritage Hotel) में बदलकर उन्हें संरक्षित किया जाता है, वैसा ही कदम सुल्तान पैलेस के लिए भी उठाया जा सकता था।

क्या आधुनिक 400 कमरों वाला होटल पटना को वह पहचान दे पाएगा, जो 100 साल पुराना यह सुल्तान पैलेस देता रहा है? यह सवाल अब हर इतिहास प्रेमी और पटनावासी के मन में कौंध रहा है।

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