सिक्कि कला: मूंज की खुशबू, छेदना की नोक और विलुप्त होती ‘सिकौहुली’ की लोक-गाथा
संस्कृति एवं लोक-परंपरा | बिहार विमर्श ग्रामीण बिहार की स्मृतियों में झांकें तो कुछ ऐसी वस्तुएं दिखती हैं जो सिर्फ घरेलू उपयोग का सामान भर नहीं थीं, बल्कि वे स्त्री-श्रम, कलात्मकता और लोक-सभ्यता की जीती-जागती प्रतीक थीं। इन्हीं में से एक है—‘सिकौहुली’ (जिसे कई इलाकों में वड़िया भी कहा जाता है)। आकार और बनावट के…